भारतीय रिजर्व बैंक  ने प्रीपेड भुगतान साधनों के बीच पारस्परिकता को अनिवार्य किया

भारतीय रिजर्व बैंक ने प्रीपेड भुगतान साधनों के बीच पारस्परिकता को अनिवार्य किया

प्रीपेड भुगतान साधन जाति कर्ताओं द्वारा आपस में प्रणालियों कि पारस्परिक ता को नहीं अपनाने पर नाराजगी जताते हुए इंडियन रिजर्व बैंक यानी आरबीआई ने बुधवार को अपने एक बयान में कहा कि ऐसी कंपनियों को इस बात का प्रावधान करना होगा कि केवाईसी को पूरा करने वाले उनके ग्राहक दूसरी कंपनियों के ग्राहकों के साथ लेनदेन कर सके

आरबीआई ने इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने दिन के अंत में किसी पेमेंट बैंक के एक खाते में रहने वाली अधिकतम धनराशि की सीमा को बढ़ाकर 200000 कर दिया है आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बुधवार को कहा की प्रीपेड भुगतान साधनों को दो हजार अट्ठारह में पारस्परिक ता को अपनाने का विकल्प दिया गया था जिसमें एक कंपनी के ग्राहक दूसरे पीपीआई या बैंकों के ग्राहकों को धनराशि भेज सकते हैं यह विकल्प उन मामलों में दिया गया था जब केवाईसी पूरा हो चुका है।

इसके बाद दास ने कहा 2 साल बीतने के बावजूद पूर्ण केवाईसी पीपीआई की ओर स्थानांतरण नहीं हुआ और इसलिए पारस्परिक ता नहीं है इसलिए पूर्व केवाईसी पीपीआई के लिए पारस्परिक ता को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव पारित हुआ।

Share